Friday, January 18, 2013

प्रतियोगिता 3


' मेरे जीवन साथी ' प्रतियोगिता 3 में भाग लेने वाले सभी मित्रो का शुक्रिया. सुनीता शर्मा जी इसमें निर्णायक भूमिका में थी .. आभार सुनिता जी [ इसमें https://www.facebook.com/groups/seedhi/192108994265510/ पढियेगा ] विजेता रहे इस प्रतियोगिता में प्रभा मित्तल जी एवं Virendra Sinha Ajnabi जी सभी प्रस्तुतियाँ विजेताओ के साथ इस प्रकार है

~प्रभा मित्तल~

मेरे जीवन साथी,
तुमसे ही मेरा श्रृंगार
सुख दुःख साथ जीये हमने,
तब पाया नेह भरा सुखी संसार।।
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सच, मेरे जीवन का सम्बल तुम हो,
तुम ही कर्म,तुम्हीं फल हो,
तुम मेरे जीवन की थाती,
ओ मेरे जीवन साथी !!

~Virendra Sinha Ajnabi ~


ओ मेरे जीवन साथी,
तेरा साथ है इसीलिए तो,
ये जिंदगी मुझे है इतनी सुहाती,
तुम बिन इतनी मधुरता कहाँ से आती
.......................................................
इतनी मधुरता इस जीवन में कहाँ से आती,
अगर तुम मेरे जीवन में ना आती,
सपने न आते, नींद न आती,
तुम बिन, मेरे जीवन साथी

अन्य प्रस्तुतियाँ 

~सूर्यदीप अंकित त्रिपाठी~

कई रंग बिरंगे फूलों से रोशन सी,
प्रीत की कोई मीठी सी धुन,
दुनियां अपनी यूँ सजायेंगे हम,
मेरे जीवन साथी सुन
\\--//\\--//\\--//
मेरे जीवन साथी सुन,
साथ तेरा हरदम यूँ रहे
हाथ ये थामे रखना तू मेरा
खुशियाँ हो चाहे कोई ग़म ही रहे

~किरण आर्य~

मेरे जीवन साथी
मैं दीया तू बाती
जन्म जन्मांतर का है साथ
हाथों में रहे थामे मेरा हाथ
................
अहसास प्यार भाव तुम्ही मोरे पिया
चाहत जो मन बसी तेरी
मुझे सदैव राह दिखाती
मेरे जीवन साथी

~बालकृष्ण डी ध्यानी~

मेरे जीवन साथी
संग संग रहूँ तेरे
साथ साथ चलूँ मै तेरे
बनके रहूँ तू डाला मै पत्ती
*****************************
साथ साथ चलें कैसे हम तुम
राहें जुदा हैं दूर तुम
बैठे हम दोनों गुमसुम
मेरे जीवन साथी

~सुनीता शर्मा~

मेरे जीवन साथी
जीवन पथ के राही
सुख दुःख के हम संगी
वचन निबाहे सदा बन निस्वार्थी यूही
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जन्मो जन्मो का है सुंदर बन्धन
हो मेरी बगिया के चन्दन
तुमसे पाऊं प्रेरणा निसदिन
मेरे जीवन साथी

~बलदाऊ गोस्वामी~


मेरे जीवन साथी,
कितनी है तु निराली।
पविञ रिश्ता है हमारा तुम्हारा,
सीने से लगाता हमें जग सारा।।
..........................................
बडी निर्मल साथी तेरी माया है,
सुमन जैसे तेरी काया है।
सदा हो तुम मेरी,
मेरे जीवन साथी।।

~अर्चना ठाकुर~

मेरे जीवन साथी
सदा निभाते मेरा साथ
बन नदी के दो पाट
हम चले एक राह एक साथ ||
*****************************
सदा हो तुम मेरे साथ साथी
जीवन में छाए बन गाक्षी
संजीवनी बन कर तुम
मेरे जीवन साथी ||

~संगीता संजय डबराल ~

तेरे पहलू में दो पल जिंदगी है बहुत
बस एक पल की ख़ुशी है बहुत
हम साथ हैं और रहेंगे उम्रभर.
माँगू दुआ, मेरे जीवन साथी
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मेरे जीवन साथी
आस तुम,विश्वाश तुम,
हर ख्वाब हर आरजू तुम,
कामना हो मेरी, शुभकामना भी तुम,

~प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल~ 
(प्रोत्साहन हेतू)

कल तक तुम से अनजान था मैं
आज हर बात में शामिल तुम
हो साथ जन्म जन्मांतर का
बनकर मेरे जीवन साथी
------------
मेरे जीवन साथी
मोहब्बत से कही ज्यादा
दोस्त से कहीं बढ़कर तुम
यूँ ही रहना मेरे साथ तुम


प्रतियोगिता 2



' मेरा जीवन ' ये  प्रतियोगिता (२) के दो महत्वपूर्ण शब्द 
१.  पहला भाव घटोतरी जिसकी अंतिम पंक्ति 'मेरा जीवन'.
२. दूसरा भाव बढ़ोतरी मे जिसकी प्रथम पंक्ति 'मेरा जीवन'.

इसमें सभी प्रतियोगी विजेता रहे !!!

~किरण आर्य~


अंखियों में चातक सी प्यास
राह तकते नैन मोरे 
सजोई जो आस
मेरा जीवन
-----------
मेरा जीवन
बिन तेरे सूना
सजना मोरा घर अंगना
अँखियाँ ढूंढे तुझे दिन रैन 


~नैनी ग्रोवर~

मैं भी तो हूँ इंसान 
केवल तन नहीं हूँ 
क्यूँ भोग बना 
मेरा जीवन--!! 
_______
मेरा जीवन 
इक आस है 
इस जहां में रहें 
स्त्री-पुरुष दोनों ही समांतर

~संगीता संजय डबराल~

दर्द की राह, मांगे पनाहं 
त्याग बलिदान सब निराधार, 
अनेकों हैं किरदार, 
"मेरा जीवन"
------------
"मेरा जीवन"
तेरा आधार, सुन!
मैंने तुझे दिया आकार,
मुझ पर सदा करे प्रहार


प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल 
(प्रोत्साहन हेतू)

हर रोज मैं जीता रहा 
रोज यूं मरता रहा 
अस्तित्व तलाशता रहा 
मेरा जीवन 
------------
मेरा जीवन 
किसके लिए है 
पहले खुद जीना सीखू 
फिर दूसरे की सुध लूँ

प्रतियोगिता 1




 [ सीढ़ी भावो की - प्रतियोगिता नंबर 1 ]
मित्रों आपको समूह की दोनों [ घटोतरी मे व बढ़ोतरी मे ] मे 
अपने भाव लिखने है एक साथ ही तभी आपकी टिप्पणी शामिल हो पाएगी। 
१. पंक्तियाँ चार ही होनी चाहिए दोनों भावो मे 
२. दोनों भावो मे एक शब्द "सोच" का होना जरूरी है। 

इस प्रतियोगिता के विजेता है 

~Bahukhandi Nautiyal Rameshwari~ 

ठिठुरती ठण्ड में, देह काँपे ।
दो कतरन पा लूंगी ।
ये सोच गयी ।
वो बच्ची ।
--------------
नयी कतरन ।
पुराना नोच लिया ।
क्या सोच गयी थी ?
तन ढक, रहेगी सदैव कंपन । 

~सूर्यदीप अंकित त्रिपाठी~ 

जस करनी तस भरनी होगी
जनम जनम भू भटकेगा
अंत समय की
सोच मनु !!
\\-//-\\//-\\-//
सोच जनु
धरा-धरा बिच
रह जाएगा लेखा-जोखा 
काहे जतन जतन कर जोरी !!


~किरण आर्य~

सोच
बन आधुनिक
क्या है पाया
निज भी है गंवाया !
...................................
आधुनिकता की अंधी होड़
अस्तित्व खोये वजूद
सोच बिसूरती
आज !


अन्य प्रस्तुतियाँ 


~बालकृष्ण डी ध्यानी~

सोच 
क्या सोचा 
सब खोया मैंने 
जो अभी अभी सोचा 
*********************
चिंता तज फिर सोच 
जो तूने सोचा
वो होगा
तेरा


~डॉ. सरोज गुप्ता~

सोच 
नव वर्ष 
मानव की निराशा 
आशा में बदल पायेगा !
~~~~~~~~~~~~
नव वर्ष का इन्तजार क्यों ?
कहीं कोई बदलाव नहीं 
सब कुछ स्थिर 
निराशवादी सोच !

~Bahukhandi Nautiyal Rameshwari~

सोच रहा क्यूँ मन यही ।
हाथ भिन्न नॊच वही ।
संकीर्ण सोच कहीं ।
सोच बदल ।
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कद छोटा ।
सोच बड़ी कर ।
भय भरा नगर नगर ।
हाथ नहीं तू सोच बदल .

~किरण आर्य~

आज सोच बदल तू सोच बदल 
सोच को दे राह सही 
सोच इक सकारात्मक सी 
राह दिखाती सोच !
....................................
अहम् हो छोटा 
सोच को कर विस्तृत 
अन्याय से आक्रोशित क्षुब्द मन 
बने सबल इक सकारात्मक सोच संग !


~नैनी ग्रोवर~

सोच 
अगर सही 
जीवन सुधर जाएगा 
अगर गलत, बिगड़ जाएगा.
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क्या सही क्या गलत 
कर खुद फैंसला 
बस ज़रा 
सोच