Saturday, January 19, 2013

" सीढ़ी - भावो की " के प्रति कुछ भाव



~प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल~
आओ बढाकर हाथ 
चलो हम साथ चले 
शब्दों के बना कर घर 
भावो का एक नया शहर बसाएं
15 January at 19:22 (बढ़ोतरी)

**** ऊपर लिखे हुए "बढ़ोतरी" पर मित्रो के भाव बढ़ोतरी/घटोतरी में ****

~सुनीता शर्मा~
शब्दों की डगर 
भावों का मनोहारी सफ़र 
स्वजनों की स्नेही भावमयी घर 
चलें सभी हाथ पकड़ बन निडर
15 January at 19:27 (बढ़ोतरी)

~नैनी ग्रोवर~ 
चलो 
कहीं दूर 
भावों के नगर 
शब्दों की नाव बना 
15 January at 19:43 (बढ़ोतरी)

~Bahukhandi Nautiyal Rameshwari~
भावों का शहर ।
हो मज़बूत शब्दों सजा ।
जाल हटा दो द्वेष के ।
रंग भर लो प्रेम स्नेह के ।
15 January at 21:42  (बढ़ोतरी)

~किरण आर्य~ 
भावो का खूबसूरत शहर
शब्दों से निर्मित सलोना घर
सजाये इसे नेह विश्वास से मिलकर
अहसासों को दिशा देता दिल का नगर 
16 January at 11:29  (बढ़ोतरी)

~Pushpa Tripathi~
भावों के धागे में गूंथते है 
शब्दों के महकते फूल नये 
अर्पित करती माला निराली 
शब्द सीढ़ी समूह 
~*~*~*~*~*~*~*~*~
ले चले हम शब्दों का कारवां 
भावों के साथ समूह गान 
'प्रतिबिम्बजी' का संदेशा नया 
मिलकर साथ खुशहाल
17 January at 22:15 ( घटोतरी / घटोतरी)






इस पोस्ट में सभी भाव पूर्व में प्रकशित हो चुके है फेसबुक के समूह " सीढ़ी - भावों की " https://www.facebook.com/groups/seedhi/

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